जश्न 3 साल पूरे होने का सरकार मन रही है बड़े ज़ोर शोर से सरकारी पैसे से यानि हमारी गाढ़ी कमाई से। किस बात जश्न मानेगा देशभर में 200 शहरों में 900 सभाओं के साथ 26 मई 2017 से लेकर 15 जून 2017 तक। मज़दूर ,किसान , बेरोज़गार युवा , छोटे व्यापारी , गरीब सभी तो दुखी हैं फिर जश्न किस बात का?
रोज़गार के मोर्चे पर यह सरकार बुरी तरह असफल हो गयी है। टीवी डिबेट में सरकारी पार्टी के प्रवक्ता कहते हैं कि हमारी सरकार ने करोड़ों लोगों को लोन दिया है व्यवसाय करने के लिए अब इसी को रोज़गार समझा जाय। लोन देकर सरकार क्या एहसान कर रही है। एक तो लोन ब्याज सहित चुकाना है नहीं चुका पाए तो संपत्ति कुर्क कराना है।
देश में सामाजिक समरसता का तानाबाना छिन्न-भिन्न हो चुका है। आये दिन लोग कानून अपने हाथ में लेकर लोगों की खुलेआम हत्याएं कर रहे हैं क्या इस बात का जश्न मनाया जा रहा है। दलित और अल्पसंख्यक आये दिन सताए जा रहे हैं। दबंग वर्ग देश के कानून को न मानकर अपना कानून चलना चाहता है। देश में नक्सलवादी ,आतंकवादी घटनाएं बढ़ चुकी हैं। सैनिकों की हत्याएं बढ़ रही हैं क्या इस बात जश्न मनाया जा रहा है ?
ख़रीदे हुए मिडिया से देश की जनता को गुमराह कब तक किया जायेगा। .? एक न एक दिन जनता हकीकत समझ ही लेगी और सत्ता के नशे को हमेशा के लिए भुला देगी।
हमारी सरकार ने ये किया ...,पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया ..... यह बताने के लिए जनता के धन की बर्बादी क्यों ? सरकार जो करती है उसका असर जनता तक खुद पहुँच जाता है फिर इतना बड़ा ड्रामा क्यों ?
@विरेश कुमार